शांति क्षमा वसे देहीं देव पैसे – संत मुक्ताबाई अभंग
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शांति क्षमा बसे देहीं देव पैसे |
चित्त समरसें मुक्त मेळु ॥१॥
निर्गुणें उपरमु देव पुरुषोत्तम |
प्रकृति संगम चेतनेचा ॥२॥
सज्ञानीं दिवटा अज्ञानी तो पैठा |
निवृत्तीच्या तटा नेतु भक्ता ॥३॥
मुक्ताई दिवस अवघा हृषीकेश |
केशर्वेविण वास शून्य पैसे ॥४॥