हो भलो तुम नंदन लालछे । मुजे गांवढी बतावछे ॥१॥
आगल पिछिल ध्यानमें आवछे । मंगल नाम तोरा मे गावछे ॥२॥
तरो सुंदर रुप मोरे मनछे । प्रीत लगी कान्हा हमछे ॥३॥
एक जनार्दनीं तोरे नामछे । गावत ध्यावत हृदयमेछे ॥४॥
हो भलो तुम नंदन लालछे । मुजे गांवढी बतावछे ॥१॥
आगल पिछिल ध्यानमें आवछे । मंगल नाम तोरा मे गावछे ॥२॥
तरो सुंदर रुप मोरे मनछे । प्रीत लगी कान्हा हमछे ॥३॥
एक जनार्दनीं तोरे नामछे । गावत ध्यावत हृदयमेछे ॥४॥