पंचक्रोशीचें आंत । पावन तीर्थ हें समस्त ॥१॥
धन्य पंढरीचा महिमा । नाहीं द्यावया उपमा ॥२॥
तीर्थ क्षेत्र देव । ऐसा नाहीं कोठें ठव ॥३॥
नगर प्रदक्षिणा । शरण एका जनार्दना ॥४॥