कल्पित देह कल्पित प्रबंध । कल्पित षट् चक्रमाळा ।
कल्पित धारण कल्पित सुषुम्ना । कल्पित मेरुमंडळ रे ॥१॥
कल्पित छांडो कल्पित छांडो । निर्विकल्प वृत्ति मांडो ।
सहजीं सहज भरपुर भरले । देह विदेह दुरी छांडो ॥धृ॥
कल्पित द्विदळ कल्पित चतुर्दळ । कल्पित अष्टकमळ कल्पित ।
द्वादश कल्पित षोडश । कल्पित ते सहस्त्र दळ रे ॥२॥
कल्पित श्रीहट कल्पित गोल्हाट । कल्पित औठ पीठ कल्पित भ्रमरगुंफा ।
कल्पित हंसपद कल्पित योग अचाट रे ॥३॥
कल्पित शिव कल्पित शक्ति । कल्पित ते निजप्राप्ति ।
जनार्दनीं निजकल्पयोगें । सहज चैतन्य निज शांति रे ॥४॥