आमुचिये कुळीं दैवत सदगुरु। आम्हांसी आधारु पाडुरंग ॥१॥
सदगुरु आमुची माता सदगुरु तो पिता । सदगुरु तो भ्राता आम्हालांगीं ॥२॥
इष्ट मित्र बंधु सज्जन सोयरे । नाहीं पै दुसरें गुरुवीण ॥३॥
सदगुरु आचार सदगुरु विचार । सदगुरुचि सार साधनांचें ॥४॥
सदगुरुचि क्षेत्र सदगुरु तो धर्म । गुरुगुह्मा वर्म आम्हांलागीं ॥५॥
सदगुरु तो यम सदगुरु नियम । सदगुरु प्राणायाम आम्हांलागीं ॥६॥
सदगुरु तो सुख सदगुरु तो मोक्ष । सदगुरु प्रत्यक्ष परब्रह्मा ॥७॥
सदगुरुचें ध्यान अखंड हृदयीं । सदगुरुच्या पायीं वृत्ती सदा ॥८॥
सदगुरुचें नाम नित्य आम्हां मुखीं । गुणातीत सुखी सदगुरुराज ॥९॥
एका जनार्दनीं गुरुकृपादृष्टीं । दिसे सर्व सृष्टी परब्रह्मा ॥१०॥