जितुका आकार दिसत । नाशिवंत जात लया ॥१॥
एक नाम सत्य सार । वाउगा पसार शीण तो ॥२॥
नामें प्राप्त ब्रह्मापद । नामें देह होय गोविंद ॥३॥
एका जनार्दनीं नाम । सर्व निरसे क्रोधकाम ॥४॥